Monday, November 19, 2018

टी-20 में 3000 रन बनाने वाली पहली क्रिकेटर बेट्स न्यूजीलैंड की ओर से ओलिंपिक में भी खेल चुकी हैं

 न्यूजीलैंड की सूजी बेट्स ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपने 3000 रन पूरे किए। वे टी-20 फॉर्मेट में 3000 रन का आंकड़ा छूने वाली दुनिया की पहली क्रिकेटर हैं। सूजी क्रिकेट के अलावा 2008 ओलिंपिक में अपनी देश की बास्केटबॉल टीम का भी प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। सूजी अपने दो भाइयों टॉम और हेनरी के साथ क्रिकेट और बॉस्केटबॉल दोनों खेला करती थीं। दोनों को खेल में पीछे छोड़ने के लिए वे मैदान में उतरीं।

2008 ओलिंपिक में सूजी न्यूजीलैंड बास्केटबॉल टीम में शामिल थीं
बेट्स ने 15 साल की उम्र में 2002 में नेशनल क्रिकेट लीग के एक मुकाबले में 184 रन की पारी खेली। इसके बाद 2006 में उन्हें न्यूजीलैंड की वनडे टीम में चुना गया। सूजी ने भारत के खिलाफ हुए इस मैच में एक विकेट लिया, लेकिन उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। बेट्स ने अपना पहला टी-20 2007 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला। उसमें सूजी ने 62 रन बनाए और विकेट भी झटके। इसके बाद वे 2008 बीजिंग ओलिंपिक में बॉस्केटबॉल खिलाड़ी के रूप में उतरीं। ओलिंपिक के लिए वे 18 महीने तक क्रिकेट से दूर रहीं।

ओपनिंग सेरेमनी में शामिल नहीं होने का अफसोस
2011 में उन्हें न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया। इसके बाद उन्होंने बॉस्केटबॉल छोड़ दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि बॉस्केटबॉल से उन्हें मेंटल और फिजिकल फिटनेस को बढ़ाने में आज भी मदद मिलती है। उनके मुताबिक, ओलिंपिक में उतरना उनके जीवन का शानदार पल था। यहां पूरी दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी उतरते हैं। उन्हें आज भी ओलिंपिक की ओपनिंग सेरेमनी में शामिल नहीं होने का अफसोस है। सेरेमनी के अगले दिन सुबह टीम का मैच था। इस कारण वे सेरेमनी में भाग नहीं ले पाईं थीं। 

पांच वर्ल्ड कप में कप्तानी की, 2015 में बेस्ट क्रिकेटर
बेट्स ने टी-20 में 108 मैचो में 31 की औसत से 3007 रन बनाए हैं। इसमें 20 अर्धशतक और एक शतक शामिल हैं। उन्होंने 49 विकेट भी झटके हैं। वनडे क्रिकेट में बेट्स ने 115 मैचों में 44 की औसत से 4245 रन बनाए। 10 शतक और 24 अर्धशतक लगाए। 2013 में उन्हें आईसीसी वनडे क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया। 2015 में उन्हें टी-20 और वनडे दोनों में बेस्ट क्रिकेटर का अवॉर्ड मिला। विस्डन ने भी 2015 में उन्हें क्रिकेटर ऑफ द वर्ल्ड चुना। वे तीन बार टी-20 और दो बार वनडे वर्ल्ड कप में टीम की कप्तान रह चुकी हैं।

रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े शब्द किलोग्राम यानी किलो की परिभाषा बदल गई है। अब एक किलोग्राम को प्लांक कॉन्स्टेंट के आधार पर मापा जाएगा। हालांकि इसका असर आम जीवन पर नहीं पड़ेगा। किलोग्राम को पहली बार 1795 में डिफाइन किया गया था। 1889 में इसे बदला गया। अब 20 मई 2019 से वैज्ञानिक किलोग्राम को मापने के नए तरीके का प्रयोग करेंगे। छात्रों को भी एग्जाम में यही परिभाषा लिखनी होगी।

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